काला जादू – एक बड़ा दिलचस्प और डरावना रहस्य!


काला जादू का नाम सामने आते ही लोग के दिमाग में बड़े अजीबोगरीब ख्याल आते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत से ज्यादा काला जादू का उपयोग अफ्रीका में होता है। अफ्रीका का काला जादू वूडू नाम से जाना जाता है। इसका लोग सालों से उपयोग करते आ रहे हैं, लेकिन सामान्य लोगों के लिए आज भी इसका ज्ञान एक रहस्य है।


कैसे होता है काला जादू

तंत्र विज्ञान के अनुसार, काला जादू यानि ब्लैक मैजिक एक बहुत दुर्लभ और जटिल प्रक्रिया है। इसे बहुत ही विशेष परिस्थितियों में अंजाम दिया जा सकता है। इसे महारथ हासिल करने के लिए उच्च कोटि की विशेषज्ञता की जरूरत होती है। इस प्रक्रिया में एक मूर्ति का उपयोग होता है, जो गुड़िया जैसी दिखती है। यह गुड़िया सामान्य गुड़िया से बेहद अलग होती है, जिसे बेसन, उड़द, जैसी खाने की चीजों से बनाया जाता है। इसमें विशेष मंत्रों से जान डाली जाती है। उसके बाद जिस व्यक्ति पर जादू करना होता है उसका नाम लेकर पुतले को जागृत किया जाता है।

अफ्रीका और अन्य देशों में कहा जाता है वूडू

अफ्रीका में मान्यता है की 1847 में एरजूली डेंटर नाम की वूडू देवी एक पेड़ पर अवतरित हुई थी। उसे सुंदरता और प्यार की देवी माना जाता था। यहां उसने कई लोगों की बीमारियां और परेशानियां अपने जादू से दूर कर दी। एक कैथोलिक पादरी को यह सब पंसद नहीं आया, और उसने इसे ईशनिंदा करार देकर उस पेड़ के तने को काट डालने का आदेश दिया। इसके बाद में स्थानीय लोगों ने यहां देवी की मूर्ति बनाई और पूजा करने लगे।


जानवरों के अंगो का होता है इस्तेमाल

वूडू में मुख्य तौर पर जानवरों के अंगो का इस्तेमाल होता है। इसमें जानवरों के अंगों से समस्या समाधान का दावा किया जाता है। इस जादू से पूर्वजों की आत्मा किसी शरीर में बुलाकर भी अपना काम करवा सकते हैं। इसके अलावा दूर बैठे इंसान के रोग व परेशानी के इलाज के लिए पुतले का भी उपयोग किया जाता है। वूडू जानने वालों का मानना है कि इस धरती पर मौजूद हर जीव शक्ति से परिपूर्ण है। इसलिए उनकी ऊर्जा का उपयोग करके बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। काला जादू के विशेषज्ञों के अनुसार यह वो ऊर्जा (शक्ति) है जिसका इस्तेमान नहीं होता।

काला जादू क्या होता है?

जानकारों का मानना है ये जादू और कुछ नहीं बस एक बंच ऑफ एनर्जी है। जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जाता है या कहें एक इंसान के द्वारा दूसरे इंसान पर भेजा जाता है। विज्ञान की भाषा में ऊर्जा को बनाया जा सकता है, न खत्म किया जा सकता है, उसे सिर्फ एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। यदि ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल है, तो नकारात्मक इस्तेमाल भी है। ऊर्जा सिर्फ ऊर्जा होती है, वह न तो पॉजीटिव होती है, न नेगेटिव। आप उससे कुछ भी कर सकते हैं।

गीता में कहा गया है

अर्जुन ने भी कृष्ण से यही सवाल पूछा था कि आपका यह कहना है कि हर चीज एक ही ऊर्जा से बनी है और हर एक चीज दैवीय है, अगर वही देवत्व दुर्योधन में भी है, तो वह ऐसे काम क्यों कर रहा है? कृष्ण ने जवाब दिया, ‘ईश्वर निर्गुण है, दिव्यता निर्गुण है। उसका अपना कोई गुण नहीं है।’ इसका अर्थ है कि वह बस विशुद्ध ऊर्जा है। आप उससे कुछ भी बना सकते हैं। जो बाघ आपको खाने आता है, उसमें भी वही ऊर्जा है और कोई देवता, जो आकर आपको बचा सकता है, उसमें भी वही ऊर्जा है। बस वे अलग-अलग तरीकों से काम कर रहे हैं।

कब किया जाता था ये जादू

विशेषज्ञ मानते हैं पुतले से किसी इंसान को तकलीफ पहुंचाना इस जादू का उद्देश्य नहीं है। इसे भगवान शिव ने अपने भक्तों को दिया था। पुराने समय में इस तरह का पुतला बनाकर उस पर प्रयोग सिर्फ कहीं दूर बैठे रोगी के उपचार व परेशानियां दूर करने के लिए किया जाता था। कुछ समय तक ऐसा करने पर तकलीफ खत्म हो जाती थी। मगर समय के साथ-साथ इसका दुरुपयोग होने लगा।

कब हुआ गलत कामों में उपयोग

कुछ स्वार्थी लोगों ने इस प्राचीन विधा को समाज के सामने गलत रूप में स्थापित किया। तभी से इसे काला जादू नाम दिया जाने लगा। दरअसल, उन्होंने अपनी ऊर्जा का उपयोग समाज को नुकसान पहुंचाने के लिए किया। गौरतलब है जिस तरह काले जादू की सहायता से सकारात्मक ऊर्जा पहुंचाकर किसी के रोग व परेशानी को दूर किया जा सकता है। ठीक उसी तरह सुई के माध्यम से किसी तक अपनी नकारात्मक ऊर्जा पहुंचाकर। उसे तकलीफ भी दी जा सकती है।

नोट- आजकल के समय में काला जादू संभव नहीं है, क्योंकि इसके सही जानकार न के बराबर है। इस लेख को हम सिर्फ एक जानकारी के तौर पर प्रकाशित कर रहे हैं न कि अंधविश्वास को बढ़ावा देने के लिए।

काला जादू – एक बड़ा दिलचस्प और डरावना रहस्य!


काला जादू का नाम सामने आते ही लोग के दिमाग में बड़े अजीबोगरीब ख्याल आते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत से ज्यादा काला जादू का उपयोग अफ्रीका में होता है। अफ्रीका का काला जादू वूडू नाम से जाना जाता है। इसका लोग सालों से उपयोग करते आ रहे हैं, लेकिन सामान्य लोगों के लिए आज भी इसका ज्ञान एक रहस्य है।


कैसे होता है काला जादू

तंत्र विज्ञान के अनुसार, काला जादू यानि ब्लैक मैजिक एक बहुत दुर्लभ और जटिल प्रक्रिया है। इसे बहुत ही विशेष परिस्थितियों में अंजाम दिया जा सकता है। इसे महारथ हासिल करने के लिए उच्च कोटि की विशेषज्ञता की जरूरत होती है। इस प्रक्रिया में एक मूर्ति का उपयोग होता है, जो गुड़िया जैसी दिखती है। यह गुड़िया सामान्य गुड़िया से बेहद अलग होती है, जिसे बेसन, उड़द, जैसी खाने की चीजों से बनाया जाता है। इसमें विशेष मंत्रों से जान डाली जाती है। उसके बाद जिस व्यक्ति पर जादू करना होता है उसका नाम लेकर पुतले को जागृत किया जाता है।

अफ्रीका और अन्य देशों में कहा जाता है वूडू

अफ्रीका में मान्यता है की 1847 में एरजूली डेंटर नाम की वूडू देवी एक पेड़ पर अवतरित हुई थी। उसे सुंदरता और प्यार की देवी माना जाता था। यहां उसने कई लोगों की बीमारियां और परेशानियां अपने जादू से दूर कर दी। एक कैथोलिक पादरी को यह सब पंसद नहीं आया, और उसने इसे ईशनिंदा करार देकर उस पेड़ के तने को काट डालने का आदेश दिया। इसके बाद में स्थानीय लोगों ने यहां देवी की मूर्ति बनाई और पूजा करने लगे।


जानवरों के अंगो का होता है इस्तेमाल

वूडू में मुख्य तौर पर जानवरों के अंगो का इस्तेमाल होता है। इसमें जानवरों के अंगों से समस्या समाधान का दावा किया जाता है। इस जादू से पूर्वजों की आत्मा किसी शरीर में बुलाकर भी अपना काम करवा सकते हैं। इसके अलावा दूर बैठे इंसान के रोग व परेशानी के इलाज के लिए पुतले का भी उपयोग किया जाता है। वूडू जानने वालों का मानना है कि इस धरती पर मौजूद हर जीव शक्ति से परिपूर्ण है। इसलिए उनकी ऊर्जा का उपयोग करके बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। काला जादू के विशेषज्ञों के अनुसार यह वो ऊर्जा (शक्ति) है जिसका इस्तेमान नहीं होता।

काला जादू क्या होता है?

जानकारों का मानना है ये जादू और कुछ नहीं बस एक बंच ऑफ एनर्जी है। जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जाता है या कहें एक इंसान के द्वारा दूसरे इंसान पर भेजा जाता है। विज्ञान की भाषा में ऊर्जा को बनाया जा सकता है, न खत्म किया जा सकता है, उसे सिर्फ एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। यदि ऊर्जा का सकारात्मक इस्तेमाल है, तो नकारात्मक इस्तेमाल भी है। ऊर्जा सिर्फ ऊर्जा होती है, वह न तो पॉजीटिव होती है, न नेगेटिव। आप उससे कुछ भी कर सकते हैं।

गीता में कहा गया है

अर्जुन ने भी कृष्ण से यही सवाल पूछा था कि आपका यह कहना है कि हर चीज एक ही ऊर्जा से बनी है और हर एक चीज दैवीय है, अगर वही देवत्व दुर्योधन में भी है, तो वह ऐसे काम क्यों कर रहा है? कृष्ण ने जवाब दिया, ‘ईश्वर निर्गुण है, दिव्यता निर्गुण है। उसका अपना कोई गुण नहीं है।’ इसका अर्थ है कि वह बस विशुद्ध ऊर्जा है। आप उससे कुछ भी बना सकते हैं। जो बाघ आपको खाने आता है, उसमें भी वही ऊर्जा है और कोई देवता, जो आकर आपको बचा सकता है, उसमें भी वही ऊर्जा है। बस वे अलग-अलग तरीकों से काम कर रहे हैं।

कब किया जाता था ये जादू

विशेषज्ञ मानते हैं पुतले से किसी इंसान को तकलीफ पहुंचाना इस जादू का उद्देश्य नहीं है। इसे भगवान शिव ने अपने भक्तों को दिया था। पुराने समय में इस तरह का पुतला बनाकर उस पर प्रयोग सिर्फ कहीं दूर बैठे रोगी के उपचार व परेशानियां दूर करने के लिए किया जाता था। कुछ समय तक ऐसा करने पर तकलीफ खत्म हो जाती थी। मगर समय के साथ-साथ इसका दुरुपयोग होने लगा।

कब हुआ गलत कामों में उपयोग

कुछ स्वार्थी लोगों ने इस प्राचीन विधा को समाज के सामने गलत रूप में स्थापित किया। तभी से इसे काला जादू नाम दिया जाने लगा। दरअसल, उन्होंने अपनी ऊर्जा का उपयोग समाज को नुकसान पहुंचाने के लिए किया। गौरतलब है जिस तरह काले जादू की सहायता से सकारात्मक ऊर्जा पहुंचाकर किसी के रोग व परेशानी को दूर किया जा सकता है। ठीक उसी तरह सुई के माध्यम से किसी तक अपनी नकारात्मक ऊर्जा पहुंचाकर। उसे तकलीफ भी दी जा सकती है।

नोट- आजकल के समय में काला जादू संभव नहीं है, क्योंकि इसके सही जानकार न के बराबर है। इस लेख को हम सिर्फ एक जानकारी के तौर पर प्रकाशित कर रहे हैं न कि अंधविश्वास को बढ़ावा देने के लिए।

पानी में दफन हो गए दुनिया के ये विशाल शहर


आपने भगवान श्री कृष्ण की नगरी द्वारका(जो कि पानी में समां चुकी है) जिसके अवशेष गुजरात प्रांत में कैम्बे की खाड़ी में है सुना ही होगा के कैसे पूरी की पूरी नगरी ही पानी में समां गई थी। ऐसे ही प्राचीन विश्व में कई शहर थे जो अपना एक अलग ही महत्व रखते थे जो पुर्ण रूप से विकसित थे, लेकिन फिर वो समय के साथ हमेशा-हमेशा के लिए पानी में दफन हो गए।
42fb6a9d9b758f6394aab54ff1c2bb81आज हम आपको पानी में दफन हो चुके इतिहास के 6 ऐसे ही चर्चित शहरों के बारे में बताएंगे। पानी के अंदर स्थित इन शहरों के अवशेष किसी अजूबे से कम नहीं है। अगर आपको इन शहरों को देखना है तो, पानी के अंदर स्कूबा ड्रेस पहनकर जाना होगा।

1. पाव्लोपेट्री, ग्रीक (Pavlopetri, Greece)1-

ग्रिक का यह शहर किसी समय में गुलज़ार रहा करता था, जो आज पानी के अंदर अति प्राचीन पुरातात्विक साइट में शुमार किया जाता है। लगभग 1000 ई.पू. ये शहर भूकंप के कारण पानी के अंदर समा गया था। इसके खंडहरों को देखकर पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि ये मानव निर्मित है। हालांकि, इस शहर को सड़कों, वास्तुकला और कब्रों सहित पूरे योजनागत तरीके से बनाया गया था।


2. क्लियोपेट्रा अलेक्जेंड्रिया, इजिप्ट (Cleopatra’s Alexandria, Egypt)2-f

रानी क्लियोपेट्रा के बारे में तो आप जानते ही होंगे इनके नाम का एक शहर भी था। क्लियोपेट्रा शहर का निर्माण इजिप्ट के शासक रहे अलेक्जेंडर द ग्रेट ने किया था। 1600 साल पहले ये शहर जलमग्न हो गया था। ऐसा बताया जाता है कि चर्चित सुंदरी व सम्राज्ञी क्लियोपेट्रा की याद में इस शहर को बनाया गया था। 1998 में समुद्री पुरातत्वविदों ने इस शहर को खोज निकाला था।

3. पोर्ट रॉयल, जमैका (Port Royal, Jamaica)3-h

इस शहर को तो जलमग्न हुए ज्यादा समय भी नहीं हुआ। जमैका का पोर्ट रॉयल शहर आज भले ही जलमग्न हो गया है, लेकिन कभी यह यूरोप के बड़े शहरों में शुमार होता था। यहां की शराब खूब लोकप्रिय थी। साथ ही यहां वेश्याएं लोगों का मनोरंजन करने के लिए प्रसिद्ध थी। जून 1962 में ये शहर जलमग्न हो गया, जिसमें 2000 लोगों की मौत हो गई थी

4. लायन सिटी ऑफ क्यूआनडाओ लेक, चीन (Lion City of Quiandao Lake, China)4-d

पानी के अंदर बसे दुनिया के प्राचीन और शानदार शहरों में से एक चीन का लायन सिटी ऑफ क्यूआनडाओ लेक है। पूर्वी हान राजवंश के दौरान इस शहर को बनाया गया था, जिसका क्षेत्रफल 62 फुटबॉल ग्राउंड के बराबर है। यह लगभग 85 से 131 फीट सतह के नीचे स्थित है।

5. द्वारका, भारत (Dwarka, Gulf of Cambay, India)5-fd

इसके बारे में तो आप जानते ही होंगे। भारत के गुजरात प्रांत में कैम्बे की खाड़ी में प्राचीन द्वारका शहर के अस्तित्व मिले हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह भगवान कृष्ण की प्राचीन नगरी द्वारका है। यह भारत के सात अति प्राचीन शहरों में से एक है। गोमती नदी के किनारे स्थित ये शहर भगवान कृष्ण की मौत के बाद ही समुद्र में जलमग्न हो गया था।

6. द पिरामिड ऑफ युनागुनी-जिमा, जापान (The Pyramids of Yonaguni-Jima, Japan)6-h

ये तो अपने आप में एक आश्चर्य ही है। जापान के र्यूक्यू आइलैंड के समीप द पिरामिड ऑफ युनागुनी-जिमा का अस्तित्व मिला है। एक ही पत्थर से बने इस पिरामिड को लेकर जानकारों में मतभेद है। कोई इसे मानव निर्मित कहता है तो प्रकृति द्वारा निर्मित बताता है। ये 10000 ई.पू. समुद्र में जलमग्न हो गया था। वर्तमान में यह 250 फीट गहरे पानी में है।

Synopsis
There’s a reason that the stories of Atlantis have long captured our imaginations. The idea that an entire city could just vanish beneath the waves is a terrifying thought – and while these lost underwater cities aren’t the mythical Atlantis, that’s exactly what happened to them.

पानी में दफन हो गए दुनिया के ये विशाल शहर


आपने भगवान श्री कृष्ण की नगरी द्वारका(जो कि पानी में समां चुकी है) जिसके अवशेष गुजरात प्रांत में कैम्बे की खाड़ी में है सुना ही होगा के कैसे पूरी की पूरी नगरी ही पानी में समां गई थी। ऐसे ही प्राचीन विश्व में कई शहर थे जो अपना एक अलग ही महत्व रखते थे जो पुर्ण रूप से विकसित थे, लेकिन फिर वो समय के साथ हमेशा-हमेशा के लिए पानी में दफन हो गए।
42fb6a9d9b758f6394aab54ff1c2bb81आज हम आपको पानी में दफन हो चुके इतिहास के 6 ऐसे ही चर्चित शहरों के बारे में बताएंगे। पानी के अंदर स्थित इन शहरों के अवशेष किसी अजूबे से कम नहीं है। अगर आपको इन शहरों को देखना है तो, पानी के अंदर स्कूबा ड्रेस पहनकर जाना होगा।

1. पाव्लोपेट्री, ग्रीक (Pavlopetri, Greece)1-

ग्रिक का यह शहर किसी समय में गुलज़ार रहा करता था, जो आज पानी के अंदर अति प्राचीन पुरातात्विक साइट में शुमार किया जाता है। लगभग 1000 ई.पू. ये शहर भूकंप के कारण पानी के अंदर समा गया था। इसके खंडहरों को देखकर पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि ये मानव निर्मित है। हालांकि, इस शहर को सड़कों, वास्तुकला और कब्रों सहित पूरे योजनागत तरीके से बनाया गया था।


2. क्लियोपेट्रा अलेक्जेंड्रिया, इजिप्ट (Cleopatra’s Alexandria, Egypt)2-f

रानी क्लियोपेट्रा के बारे में तो आप जानते ही होंगे इनके नाम का एक शहर भी था। क्लियोपेट्रा शहर का निर्माण इजिप्ट के शासक रहे अलेक्जेंडर द ग्रेट ने किया था। 1600 साल पहले ये शहर जलमग्न हो गया था। ऐसा बताया जाता है कि चर्चित सुंदरी व सम्राज्ञी क्लियोपेट्रा की याद में इस शहर को बनाया गया था। 1998 में समुद्री पुरातत्वविदों ने इस शहर को खोज निकाला था।

3. पोर्ट रॉयल, जमैका (Port Royal, Jamaica)3-h

इस शहर को तो जलमग्न हुए ज्यादा समय भी नहीं हुआ। जमैका का पोर्ट रॉयल शहर आज भले ही जलमग्न हो गया है, लेकिन कभी यह यूरोप के बड़े शहरों में शुमार होता था। यहां की शराब खूब लोकप्रिय थी। साथ ही यहां वेश्याएं लोगों का मनोरंजन करने के लिए प्रसिद्ध थी। जून 1962 में ये शहर जलमग्न हो गया, जिसमें 2000 लोगों की मौत हो गई थी

4. लायन सिटी ऑफ क्यूआनडाओ लेक, चीन (Lion City of Quiandao Lake, China)4-d

पानी के अंदर बसे दुनिया के प्राचीन और शानदार शहरों में से एक चीन का लायन सिटी ऑफ क्यूआनडाओ लेक है। पूर्वी हान राजवंश के दौरान इस शहर को बनाया गया था, जिसका क्षेत्रफल 62 फुटबॉल ग्राउंड के बराबर है। यह लगभग 85 से 131 फीट सतह के नीचे स्थित है।

5. द्वारका, भारत (Dwarka, Gulf of Cambay, India)5-fd

इसके बारे में तो आप जानते ही होंगे। भारत के गुजरात प्रांत में कैम्बे की खाड़ी में प्राचीन द्वारका शहर के अस्तित्व मिले हैं। ऐसा कहा जाता है कि यह भगवान कृष्ण की प्राचीन नगरी द्वारका है। यह भारत के सात अति प्राचीन शहरों में से एक है। गोमती नदी के किनारे स्थित ये शहर भगवान कृष्ण की मौत के बाद ही समुद्र में जलमग्न हो गया था।

6. द पिरामिड ऑफ युनागुनी-जिमा, जापान (The Pyramids of Yonaguni-Jima, Japan)6-h

ये तो अपने आप में एक आश्चर्य ही है। जापान के र्यूक्यू आइलैंड के समीप द पिरामिड ऑफ युनागुनी-जिमा का अस्तित्व मिला है। एक ही पत्थर से बने इस पिरामिड को लेकर जानकारों में मतभेद है। कोई इसे मानव निर्मित कहता है तो प्रकृति द्वारा निर्मित बताता है। ये 10000 ई.पू. समुद्र में जलमग्न हो गया था। वर्तमान में यह 250 फीट गहरे पानी में है।

Synopsis
There’s a reason that the stories of Atlantis have long captured our imaginations. The idea that an entire city could just vanish beneath the waves is a terrifying thought – and while these lost underwater cities aren’t the mythical Atlantis, that’s exactly what happened to them.

इस श्राप की वजह से भगवान ब्रह्मा का बना सिर्फ एक ही मंदिर!



भगवान ब्रह्मा को इस संसार का रचनाकार कहा जाता है लेकिन फिर भी भारत में उनका सिर्फ एक ही मंदिर है। जबकि बाकी सभी देवी-देवताओं के सैकड़ो-हज़ारो मंदिर मौजूद हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री ने उन्हें श्राप दिया था। यही कारण है कि ब्रह्मा जी का देश में एक ही मंदिर है जो कि राजस्थान के प्रसिद्ध तीर्थ पुष्कर में स्थित है। सावित्री ने अपने पति ब्रह्मा को ऐसा श्राप क्यों दिया था इसका वर्णन पद्म पुराण में मिलता है।

ब्रह्मा जी को क्यों दिया गया श्राप

हिन्दू धर्मग्रन्थ पद्म पुराण के अनुसार धरती पर वज्रनाश नामक राक्षस ने उत्पात मचा रखा था। उसके बढ़ते अत्याचारों से तंग आकर ब्रह्मा जी ने उसका वध कर दिया। लेकिन वध करते समय उनके हाथों से तीन जगहों पर कमल का पुष्प गिरा, इन तीनों जगहों पर तीन झीलें बन गई। इस घटना के बाद इस स्थान का नाम पुष्कर पड़ गया औऱ ब्रह्मा ने संसार की भलाई के लिए यहां एक यज्ञ करने का फैसला किया। ब्रह्मा जी यज्ञ करने के लिए पुष्कर पहुंच गए लेकिन उनकी पत्नी सावित्री जी समय पर नहीं पहुंच सकीं। यज्ञ को पूर्ण करने के लिए उनके साथ उनकी पत्नी का होना जरूरी था, लेकिन सावित्री जी के नहीं पहुंचने की वजह से ब्रह्मा जी ने गुर्जर समुदाय की एक कन्या ‘गायत्री’ से विवाह कर इस यज्ञ को शुरू किया। उसी दौरान देवी सावित्री वहां पहुंची और ब्रह्मा के बगल में दूसरी कन्या को बैठा देख क्रोधित हो गईं।
उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि देवता होने के बावजूद कभी भी उनकी पूजा नहीं होगी। सावित्री के इस रुप को देखकर सभी देवता डर गए। सभी ने सावित्री जी से विनती की कि अपना श्राप वापस ले लीजिए, लेकिन उन्होंने किसा की न सुनी। जब गुस्सा ठंडा हुआ तो सावित्री ने कहा कि इस धरती पर सिर्फ पुष्कर में ही आपकी पूजा होगी। कोई भी आपका मंदिर बनाएगा तो उसका विनाश हो जाएगा।
भगवान विष्णु ने भी इस काम में ब्रह्मा जी की मदद की थी। इसलिए देवी सरस्वती ने विष्णु जी को भी श्राप दिया था कि उन्हें पत्नी से विरह का कष्ट सहन करना पड़ेगा। इसी कारण भगवान विष्णु ने राम के रुप में मानव अवतार लिया और 14 साल के वनवास के दौरान उन्हें पत्नी से अलग रहना पड़ा था।

कोई नहीं जानता कब बना यह मंदिर

ब्रह्मा जी के मंदिर का निर्माण कब हुआ व किसने किया इसका कोई उल्लेख नहीं है। लेकिन ऐसा कहते हैं की आज से तकरीबन एक हजार दो सौ साल पहले अरण्व वंश के एक शासक को एक स्वप्न आया था कि इस जगह पर एक मंदिर है जिसके सही रख-रखाव की जरूरत है। तब उस राजा ने इस मंदिर के पुराने ढांचे को दोबारा जीवित किया।


सावित्री का भी है मंदिर

पुष्कर में सावित्री जी का भी मंदिर है लेकिन वो ब्रह्मा जी के पास न होकर ब्रह्मा जी के मंदिर के पीछे एक पहाड़ी पर स्थित है जहां तक पहुंचने के लिए सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

कार्तिक पूर्णिमा पर लगाता है पुष्कर मेला

भगवान ब्रह्मा ने पुष्कर में कार्तिक पूर्णिमा के दिन यज्ञ किया था। यही कारण है कि हर साल अक्टूबर-नवंबर के बीच पड़ने वाली कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पुष्कर मेला लगता है। मेले के दौरान ब्रह्मा जी के मंदिर में हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं। इन दिनों में भगवान ब्रह्मा की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है।

इस श्राप की वजह से भगवान ब्रह्मा का बना सिर्फ एक ही मंदिर!



भगवान ब्रह्मा को इस संसार का रचनाकार कहा जाता है लेकिन फिर भी भारत में उनका सिर्फ एक ही मंदिर है। जबकि बाकी सभी देवी-देवताओं के सैकड़ो-हज़ारो मंदिर मौजूद हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री ने उन्हें श्राप दिया था। यही कारण है कि ब्रह्मा जी का देश में एक ही मंदिर है जो कि राजस्थान के प्रसिद्ध तीर्थ पुष्कर में स्थित है। सावित्री ने अपने पति ब्रह्मा को ऐसा श्राप क्यों दिया था इसका वर्णन पद्म पुराण में मिलता है।

ब्रह्मा जी को क्यों दिया गया श्राप

हिन्दू धर्मग्रन्थ पद्म पुराण के अनुसार धरती पर वज्रनाश नामक राक्षस ने उत्पात मचा रखा था। उसके बढ़ते अत्याचारों से तंग आकर ब्रह्मा जी ने उसका वध कर दिया। लेकिन वध करते समय उनके हाथों से तीन जगहों पर कमल का पुष्प गिरा, इन तीनों जगहों पर तीन झीलें बन गई। इस घटना के बाद इस स्थान का नाम पुष्कर पड़ गया औऱ ब्रह्मा ने संसार की भलाई के लिए यहां एक यज्ञ करने का फैसला किया। ब्रह्मा जी यज्ञ करने के लिए पुष्कर पहुंच गए लेकिन उनकी पत्नी सावित्री जी समय पर नहीं पहुंच सकीं। यज्ञ को पूर्ण करने के लिए उनके साथ उनकी पत्नी का होना जरूरी था, लेकिन सावित्री जी के नहीं पहुंचने की वजह से ब्रह्मा जी ने गुर्जर समुदाय की एक कन्या ‘गायत्री’ से विवाह कर इस यज्ञ को शुरू किया। उसी दौरान देवी सावित्री वहां पहुंची और ब्रह्मा के बगल में दूसरी कन्या को बैठा देख क्रोधित हो गईं।
उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि देवता होने के बावजूद कभी भी उनकी पूजा नहीं होगी। सावित्री के इस रुप को देखकर सभी देवता डर गए। सभी ने सावित्री जी से विनती की कि अपना श्राप वापस ले लीजिए, लेकिन उन्होंने किसा की न सुनी। जब गुस्सा ठंडा हुआ तो सावित्री ने कहा कि इस धरती पर सिर्फ पुष्कर में ही आपकी पूजा होगी। कोई भी आपका मंदिर बनाएगा तो उसका विनाश हो जाएगा।
भगवान विष्णु ने भी इस काम में ब्रह्मा जी की मदद की थी। इसलिए देवी सरस्वती ने विष्णु जी को भी श्राप दिया था कि उन्हें पत्नी से विरह का कष्ट सहन करना पड़ेगा। इसी कारण भगवान विष्णु ने राम के रुप में मानव अवतार लिया और 14 साल के वनवास के दौरान उन्हें पत्नी से अलग रहना पड़ा था।

कोई नहीं जानता कब बना यह मंदिर

ब्रह्मा जी के मंदिर का निर्माण कब हुआ व किसने किया इसका कोई उल्लेख नहीं है। लेकिन ऐसा कहते हैं की आज से तकरीबन एक हजार दो सौ साल पहले अरण्व वंश के एक शासक को एक स्वप्न आया था कि इस जगह पर एक मंदिर है जिसके सही रख-रखाव की जरूरत है। तब उस राजा ने इस मंदिर के पुराने ढांचे को दोबारा जीवित किया।


सावित्री का भी है मंदिर

पुष्कर में सावित्री जी का भी मंदिर है लेकिन वो ब्रह्मा जी के पास न होकर ब्रह्मा जी के मंदिर के पीछे एक पहाड़ी पर स्थित है जहां तक पहुंचने के लिए सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

कार्तिक पूर्णिमा पर लगाता है पुष्कर मेला

भगवान ब्रह्मा ने पुष्कर में कार्तिक पूर्णिमा के दिन यज्ञ किया था। यही कारण है कि हर साल अक्टूबर-नवंबर के बीच पड़ने वाली कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पुष्कर मेला लगता है। मेले के दौरान ब्रह्मा जी के मंदिर में हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं। इन दिनों में भगवान ब्रह्मा की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है।

किताबों ने हमें कभी नहीं बताया कि महाभारत युद्ध के बाद क्या हुआ!


महाभारत में ज़िदगी से जुड़ सभी सवाल के जवाब मिल जाएंगे। मानव इतिहास में इसे सबसे भीषण युद्ध कहा गया जाता है। 18 दिन तक चले इस युद्ध में उस समय के भारत के करीब 80% पुरुष मारे गए थे। तभी से हमें यह बताया जा रहा है कि पांडवों ने कौरव सेना को हरा कर अपना अधिकार उनसे प्राप्त कर लिए। मगर कभी शायद किसी ने यह नहीं बताया कि इस धर्मयुद्ध में जीत के बाद पांडवों का क्या हुआ? उन्होंने कितने वर्ष तक राज किया? श्रीकृष्ण का क्या हुआ?

अगर आपको भी इस तरह के तमाम सवालों के जवाब नहीं, मालूम, तो यह रहे इसके जवाब:


1. कुरुक्षेत्र का रण जीतने के बाद, युधिष्ठिर हस्तिनापुर के सिंहासन पर विराजित हुए। मगर शुकाकुल गांधारी ने श्रीकृष्ण को श्राप दिया कि उनके यदुवंश का भी नाश कौरवों की तरह निश्चित ही होगा।


2. पांडवों ने 36 सालों तक हस्तिनापुर पर राज किया। इस दौरान गांधारी के श्राप ने अपना असर दिखाया और द्वारका नगरी में यदुवंशी आपस में ही एक-दूसरे को मारने लगे। इस तरह उनके वंश का पतन शुरु हो गया।


3. एक शिकारी ने गलती से श्रीकृष्ण की ऐड़ी में तीर मार दिया, जिसके चलते उनकी ‘मृत्यु’ हो गई। इसके बाद उन्होंने मानव शरीर का त्याग कर दिया। इस घटना के बाग, ऋषि वेद व्यास ने अर्जुन से कहा कि अब पांडवों के जीवन का उद्देश्य खत्म।

4. इसके साथ ही द्वापर युग अपने अंतिम समय पर आ गया और कलियुग की शुरुआत हुई। युधिष्ठिर ने अपने पौत्र परिक्षित को राज्यभार दे दिया और पांचों पांडव द्रौपदी के साथ स्वर्ग की ओर निकल पड़े। उनके साथ एक कुत्ता भी उनके साथ चल दिया।
5. उनकी स्वर्ग यात्रा के दौरान एक के बाद एक करके पांडवों की मृत्यु होने लग गई। सबसे पहले द्रौपदी की मृत्यु हुई। मृतकों में भीम अंतिम थे। सभी की मृत्यु के कारण उनकी इच्छाओं और कामनाओं के अभिमान से जुड़े थे। युधिष्ठिर और उस कुत्ते के अलावा कोई और स्वर्ग तक नहीं पहुँच पाया।
6. स्वर्ग के द्वार पर कुत्ता यम के रूप में प्रकट होता है और युधिष्ठिर को अंदर लेकर जाते हैं। इससे पहले वो युधिष्ठिर को नर्क के नज़ारे दिखाते हैं, जहां द्रौपदी और उनके भाई अपने पापों का प्रायश्चित करते हैं। इसके बाद इंद्र युधिष्ठिर को स्वर्ग लेकर जाते हैं उन्हें बताते हैं कि जल्द ही वे सब भी स्वर्ग आएंगे।

इस तरह श्रीकृष्ण और पांडवों ने इस संसार से विदा ली। इसके बाद कलियुग का आरंभ हुआ, जिसे हम आज की दुनिया मानते हैं।

बरमूडा ट्राइएंगल जैसे और भी रहस्य हैं धरती पर!



बरमूडा ट्राइएंगल की आपने अनेको कहानियां सुनी होंगी सबसे अधिक संख्या में यही से शिप और प्लेन गायब हुए है। लेकिन दुनिया में सिर्फ बरमूडा ट्राइएंगल  ही नही कई ऐसी और भी जगह है। जहां पर आदमी से लेकर जहाज और शिप गायब हो चुके है। जिसका रहस्य आज तक कायम है। जाने कौन-कौन से ऐसे अनोखी जगह धरती पर है।

बरमूडा ट्राइएंगलBermuda Triangle

स्थित : यह क्षेत्र ब्राजील के तट से करीब 300 किमी दूरी पर है। बरमूडा ट्राइएंगल के क्षेत्रफल को लेकर अलग-अलग मत हैं।  इसे 13 लाख वर्ग किमी से लेकर 15 लाख वर्ग किमी तक माना जा रहा है।
घटनाएं :सेटेलाइट और अंतरिक्षण यान की सिस्टम काम करना बंद कर देते हैं।
हबल टेलिस्कोप वास्तव में बंद कर दिए जाते हैं, जब ये यहां से गुजरते हैं।
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जब इस क्षेत्र में होता है, तो उस समय स्पेसवॉक का शेड्यूल बंद कर दिया जाता है। यह दिन में पांच बार होता है।
दुनिया में सबसे अधिक विमान लापता होने की घटनाएं इसी क्षेत्र में हुई हैं।

मिशिगन ट्राइएंगल /Michigan Triangle

स्थित: यह जियोग्राफिकल ट्राइएंगल मिशिगन लेक के मध्य में स्थित है।लेक मिशिगन अमेरिका की सबसे पांच बड़ी झीलों में से दूसरी नंबर की है। यह 307 मील लंबी और 188 मील चौड़ी है। लेक मिशिगन इलिनॉइस, मिशिगन, इंडियाना और विस्कानसिन राज्य तक फैली है।
घटनाएं : यहां कई प्लेन और शिप गायब हो चुके हैं। मिशिगन लेक में करीब 40 प्लेन लापता हो चुके हैं।
जून 1950 में न्यूयॉर्क से नॉर्थवेस्ट एयरलाइंस की फ्लाइट -2501 ने मिनेअपोलिस से उड़ान भरी और लेक मिशिगन में फंस गया। 55 यात्रियों में से कोई भी नहीं बच सका। विमान का भी कुछ पता नहीं चल सका।
28 अप्रैल 1937 को ओएम मैकफारलैंड मालवाहक शिप विस्कानसिन के पोर्ट वॉशिंगटन के लिए रवाना हुआ। यह जब मिशिगन ट्राइएंगल से होकर गुजरा था। इसका एक कैप्टन जॉर्ज आर. डोनर अपने कैबिन से गायब हो गया था। उसका कैबिन भी अंदर से बंद मिला था।
कई रहस्यमयी आकृतियां देखने की रिपोर्ट्स आने के बाद फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने एक स्पेशल लेक रिपोर्टिंग सर्विस शुरू की। इसमें ऐसी घटनाओं को दर्ज किया जाता है।

एंगिकुनी लेक / Angikuni lake

स्थित: एंगिकुनी लेक कनाडा के किवलिक रीजन में नुनावुट में यह कैजान नदी से लगी हुई है।
घटनाएं : एक गांव के लोगों के गायब होने का एक मिथक प्रचलित है। एंगिकुनी लेक के किनारे बसे गांव के सारे लोग 1930 में एक दिन अचानक गायब हो गए। एक व्यक्ति जो लाबेल इस गांव में आया, तो उसने देखा कि घर के चूल्हों खाना पकाने लिए रखा हुआ था। ऐसा लग रहा था कि सारे लोग अधूरा काम ही छोड़कर गायब हो गए। इसके बाद उनका पता नहीं चल सका। इस गांव की आबादी लगभग 2000 तक रही होगी।

दानव का समुद्र /The Devil’s Sea

इसे डेविल्स या ड्रैगन का ट्राइएंगल कहते हैं। यह प्रशांत महासागर में ठीक उसी तरह की पहेली बना हुआ जैसा अटलांटिक में बरमूडा। जापान की सरकार ने इस क्षेत्र में मछुआड़ो को फिशिंग करने से भी मनाही कर चुकी है।
स्थित : यह जापान के पास स्थित है।
घटनाएं : विचित्र रोशनी, वस्तुएं और मानव आकृतियां दिखाई देती हैं। रहस्मयी ढंग से लोग यहां गायब हो जाते हैं।
जापान की सरकार ने 1952 में इस क्षेत्र की घटनाओं की सत्यता जानने के लिए एक टीम को शिप कैओ मारु नंबर 5 में भेजा था, लेकिन क्रू मेंबर और 31 लोगों समेत यह गायब हो गया।
इस डेविल्स सी से एक अन्य स्टोरी खतरनाक आक्रमणकारी कुबलाई खान से भी जुड़ी हुई है। वह जापान पर हमला करना चाहता था। इस कोशिश में उसके 40,000 लोग इस क्षेत्र में गायब हो गए।

ब्रिजवाटर ट्राइएंगल /Bridgewater Triangle

स्थित : बोस्टन (अमेरिका )के ठीक साउथ से दक्षिणपूर्वी मैसाचुसेट्स में। यह 200 वर्ग किमी में क्षेत्र फैला है।
घटनाएं :  इस क्षेत्र में कई विचित्र और रहस्यमय जीव और रोशनी दिखाई देती रही है।
1970 में कई रिपोर्ट्स आई थीं कि यहां लंबे बालों वाले वानर दिखाई देते थे।
1976 में दैत्य की तरह लाल आंखों वाला व्यक्ति एक कुत्ते के साथ दिखाई देता था।
यहां कई बार रहस्यमयी एक ब्लैक हेलिकॉप्टर दिखाई देता रहा है।

 बेननिंगटन ट्राइएंगल /Bennington Triangle

स्थित : अमेरिका के साउथवेस्टर्न वेरमॉन्ट में स्थित है। यह रहस्यमयी ट्राइएंगल ग्लासटेनबरी माउंटेन के मध्य में स्थित है। इस पास बेननिंगटन, वुडफोर्ड, सॉफ्ट्सबरी और समरसेट स्थित हैं।
घटनाएं : इस इलाके में बड़े पैरों वाली मानव आकृतियां, विचित्र आवाजें और रोशनी दिखाई देती है। अमेरिकी इसे श्रापित इलाका मानते हैं। किंवदंती है कि यहां बालों वाला जंगली इंसान घूमता है और जंगलों में कई रहस्यमयी जानवर दिखाई देते हैं।
1945 में मेंडी रिवर्स नाम का व्यक्ति इस क्षेत्र में गाइड का काम करता था। 12 नवंबर 1945 को वह ने कैंप लौटते वक्त रास्ते में कहीं खो गया। इसके बाद उसका पता नहीं चला। यह घटना पास के लंबे रेल रोड पर हुई थी। 75 वर्षीय मेंडी इस इलाके के चप्पे-चप्पे से परिचित था।
1949 में तीन शिकारी इस इलाके में गायब हो गए। इसके बाद उनका पता कभी नहीं चल सका।
1949 में जेम्स ई. जेफोर्ड नाम का व्यक्ति बेननिंगटन क्षेत्र में गायब हो गया। इसके बाद उसका भी पता नहीं चल सका।

सान लुइस वैली /San Luis Valley

स्थित : अमेरिका के कोलोरोडो राज्य में फैली सान लुइस वैली न्यू मैक्सिको के कुछ हिस्से तक में फैली है। 8000 वर्ग मील क्षेत्रफल वाली यह वैली 196 किमी लंबी और 119 किमी चौड़ी है।
घटनाएं : रहस्यमयी आकृतियां दिखाई देना।पालतू जानवरों को मारने की घटनाएं। इनके शरीर में घाव दिखाई देता था। शरीर का अंग भी गायब होते हैं, लेकिन खून की एक भी बूंद दिखाई नहीं देना।
जूडी मेसोलिन नाम की महिला ने यूएफओ अपने खेत पर देखी। वह वर्ष 2000 से अब तक 50 से अधिक यूएफओ दिखने की घटनाओं की गवाह है।